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मुझे अपनी बांहो मे सुला दो जानू


Antarvasna, hindi sex story: मेरे दिल में बचपन से ही कुछ बड़ा करने की इच्छा थी मेरा परिवार बिल्कुल ही निम्न स्तर की जिंदगी जीने को विवश हो चुका था क्योंकि हमारे पास खाने तक को कुछ नहीं था। मैंने उसी वक्त अपने जीवन में फैसला कर लिया था कि मैं ऐसी जिंदगी अब नही जिऊँगा और मैंने अपने जीवन में हमेशा संघर्ष करना ही सीखा। मेरी उम्र महज 12 वर्ष की थी और 12 वर्ष की छोटी सी उम्र में मैंने अपनी पढ़ाई से नाता तोड़ लिया और एक दुकान पर काम करने लगा। छोटी सी उम्र में काम करने से मुझे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन मैं चाहता था कि मैं अपने जीवन में ऐसा कुछ करुं जिससे कि सब लोग मेरी हमेशा ही तारीफ करने लगे। मैं अपने परिवार के लिए भी कुछ करना चाहता था मैं जब भी किसी बड़े आदमी को देखता तो मुझे ऐसा प्रतीत होता कि काश मैं भी उतना बड़ा आदमी बन पाता।

मैंने बचपन से ही अपने दिमाग में एक चीज तो बैठा ही ली थी कि मुझे कुछ अच्छा करना है इसके लिए मैंने काफी समय तक तो एक छोटे से होटल में काम किया और उसके बाद मैंने कुछ समय तक ड्राइवर की नौकरी भी की लेकिन मुझे वह सब रास नहीं आया। मेरे माता-पिता गरीब जरूर थे लेकिन वह दिल के बड़े ही सच्चे थे इसीलिए तो वह कभी भी किसी का बुरा नहीं चाहते थे। मुझे क्या मालूम था कि मेरे जीवन में अभी तो और भी कष्ट आने वाले हैं और उसी बीच मेरी बहन का पैर फिसल गया। जब उसका पैर फिसला तो वह सीढ़ियों से बड़ी तेजी से नीचे गिरी और जैसे ही वह नीचे गिरी तो मुझे एहसास हुआ कि वह बहुत जख्मी हो चुकी है। मैं उसे एक बडे अस्पताल में ले गया वहां पर उसका इलाज चला लेकिन इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। मुझे इस बात का बहुत दुख था और कई दिनों तक मैं इसी गम में डूबा रहा हमारे पास खाने की भी समस्या थी इसलिए मुझे काम पर तो जाना ही था मैं अपने काम पर लौट गया। दिन रात मेरे दिमाग में सिर्फ यही चलता रहता कि कब मेरे जीवन में कुछ ऐसा होगा जिससे कि मेरी किस्मत बदल जाएगी लेकिन ऐसा कुछ होता हुआ मुझे दिखाई नहीं दे रहा था।

उसी बीच मेरी मुलाकात एक लड़के से हुई उसका नाम विकास था विकास एक नंबर का तेज और तरार लड़का है वह इतना तेज तरार था कि उसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं था। विकास ने हीं मेरे अंदर यह बदलाव पैदा किया कि इस दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है। विकास की कहानी भी बिल्कुल मेरी तरह ही थी हम दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू थे हम दोनों की जिंदगी में काफी समानता थी। मेरे ऊपर अब मेरे मां बाप की जिम्मेदारियां थी और विकास के ऊपर भी उसके मां-बाप की जिम्मेदारियां थी लेकिन वह पढ़ा लिखा था और मैं ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाया था। हम दोनों के जीवन में एक जैसे समानताएं होने के कारण हम दोनों ने एक दूसरे का हाथ थामने के बारे में सोच लिया था। विकास की जबसे मुझसे दोस्ती हुई तब से हम दोनों ने कुछ करने की ठान ली थी विकास का दिमाग बहुत ही तेज था और उसी की बदौलत उसने अब पैसे जमा करने शुरू कर दिए थे। विकास मुझे अपने भाई की तरह ही मानता और हम दोनों की दोस्ती के चलते अब पैसे भी आने लगे थे हम दोनों ने काफी पैसे जमा कर लिए थे। उसके बाद हम लोगों ने एक छोटी सी फैक्ट्री खोली उसमें हम लोग गाड़ियों के सामान बनाया करते थे। एक बार हम लोगों को इसमे बड़ा नुकसान हो गया हमारे काम ना चलने की वजह से हमें उसमें नुकसान हो गया। हमारे पास जितने भी पैसे थे वह सब खत्म हो चुके थे विकास भी काफी परेशान था और मैं तो पूरी तरीके से टूट चुका था। मैंने जो बड़े सपने देखे थे वह मुझे टूटते दिखाई दे रहे थे लेकिन तभी मेरी किस्मत बदलने वाली थी और एक दिन मेरे जीवन में मालती आई मालती एक बड़े घराने की लड़की थी। विकास ने मुझे कहा कि तुम मालती को कभी अपने बारे में सच मत बताना। मैंने मालती को अपने बारे में सच नहीं बताया लेकिन हम दोनों की प्यार की नींव एक झूठ पर टिकी हुई थी इसलिए हम दोनों का प्यार ज्यादा समय तक नहीं चलने वाला था मुझे इस बात का डर भी था लेकिन फिर भी मैं मानती से अपने बारे में छुपाता रहा।

मालती को लगता था कि मैं एक अच्छे घराने का लड़का हूं मेरे मां-बाप काफी अमीर हैं। यह सब विकास की वजह से हुआ था क्योंकि विकास ने मुझे मना किया था इसलिए मालती भी शायद मेरे प्यार में खींची चली आई थी लेकिन झूठ कितने दिन तक छुपता एक दिन तो सच मालती के सामने आना ही था। जब मालती के सामने मेरी सच्चाई आई तो वह मुझसे गुस्सा हो गई क्योंकि उसे इस बात का बहुत सदमा लगा था उसने मुझे कहा यदि तुम मुझे सच बता देते तो शायद मैं तुम्हें माफ कर देती लेकिन तुमने मेरे दिल के साथ खिलवाड़ किया है। मैंने मालती से कहा मालती मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं मैंने तुमसे उस वक्त सिर्फ इसीलिए झूठ बोला था क्योंकि मैं तुम्हें पाना चाहता था। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना शायद मेरा जीवन ही अधूरा है लेकिन मालती को अब इस बात से कोई भी फर्क नहीं पड़ने वाला था और वह मुझसे दूर जाने की कोशिश करने लगी। काफी समय तक हम दोनों की मुलाकात नहीं हुई लेकिन उस वक्त विकाश ने मेरा बहुत साथ दिया और यदि विकास उस वक्त मेरा साथ नहीं देता तो शायद हम दोनों के बीच दोबारा से बातचीत ना होती। विकास ने मुझे कहा कि तुम चिंता मत करो मैं तुम्हारे और मालती के बीच में सब कुछ ठीक कर दूंगा। आखिरकार विकास ने मेरे और मालती के बीच में सब कुछ ठीक कर दिया था मालती को विकास ने अपने तरीके से समझाया तो वह पता नहीं विकास की बात कैसे समझ गई और दोबारा से हम दोनों के बीच वही प्यार चलने लगा। सब कुछ पहले जैसा सामान्य होने लगा था मालती एक अमीर घराने की लड़की थी उसे मेरे बारे में सब कुछ पता चल चुका था तो वह चाहती थी कि मैं अपने पैरों पर खड़ा हो जाऊं और अपने जीवन में कुछ अच्छा करुं इसके लिए मालती ने अपने पापा से कुछ पैसे भी ले लिए।

मैंने जब विकास से कहा कि हमें कुछ काम शुरू करना चाहिए तो विकास कहने लगा पिछली बार मेरी वजह से ही सारा काम चौपट हुआ था इस बार तुम भी कुछ सोचो। मैंने विकास से कहा मुझसे ज्यादा तो तुम्हें मालूम है तुम ही क्यों कुछ नहीं कुछ सोचते विकास यह लगा ठीक है मैं ही कुछ सोचता हूं। हमारे पास पैसे भी आ चुके थे और मेरे पास अब मालती का प्यार भी था मालती से मैं बहुत ज्यादा प्यार करता था मालती भी मुझसे बहुत प्यार करती थी लेकिन हम दोनों के बीच अमीर और गरीब की दीवार आ ही गई। एक दिन मालती के पिताजी को हमारे बारे में पता चल गया तो उन्होंने हम लोगों का मिलना बंद करवा दिया। मालती मेरे बिना तड़प रही थी और मैं मालती के बिना तड़प रहा था। मैं उससे मिलना चाहता था लेकिन मेरे अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं उसे मिल पाता उसके घर की ऊंची दीवारों को फांद पाना मेरे लिए मुश्किल था। मेरी राह आसान नही थी विकास के लिए कुछ भी मुश्किल बात नहीं थी वह मालती को मुझसे मिलाने के लिए ले आया। जब वह मुझसे मालती को मिलाने के लिए लाया तो मैं तड़प रहा था मेरी तडप इसलिए थी क्योंकि मैं मालती से कई दिनों से नहीं मिल पाया था। मालती ने मुझे गले लगा लिया मैंने भी उसे गले लगा लिया। विकास कहने लगा मैं अभी चलता हूं विकास वहां से चला गया। मालती और मै एक दूसरे के होठों को चूमने लगे हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूमते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता।

मुझे बड़ा मजा आ रहा था मैंने पहली बार ही मालती के गुलाबी होंठो का रसपान किया। मुझे उसके होठों को चूसने में बड़ा मजा आ रहा था मैं उसके होठों को काफी देर तक चूसता रहा। मैंने जब मालती से कहा तुम अपने कपड़े उतारो तो मालती कहने लगी नहीं आकाश रहने दो लेकिन मैं कहां मानने वाला था। मैं तो मालती के साथ शारीरिक संबंध बनाना ही चाहता था मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए जब मैंने उसकी ब्रा के हुक को उखाड़ फेंको तो वह मेरी हो चुकी थी। मैंने मालती के पहाड़ जैसे स्तनों को अपने मुंह में ले लिया और उन्हें काफी देर तक मैंने चूसा। जिससे कि उसके अंदर गर्मी बढने लगी थी और मेरे अंदर भी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी थी। हम दोनों एक दूसरे को देखकर रह ना सके मालती ने भी तय कर लिया था कि वह भी अब मेरा पूरा साथ देगी। जब मालती ने मेरे मोटे लंड को अपने हाथों से हिलाना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था वह मेरे लंड को काफी देर तक हिलाती रही

। जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया तो मुझे और भी अधिक मजा आने लगा। वह जिस प्रकार से मेरे लंड का रसपान कर रही थी उससे मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ निकल आया था और मैं अब बिल्कुल भी रह ना सका। जैसे ही मैंने मालती की योनि के अंदर अपने मोटे लंड को डाला तो मालती की योनि से खून बाहर बड़ी तेजी से निकलने लगा था। उसकी योनि से इतनी तेजी से खून निकल रहा था कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैं अपने मोटे से लंड को मालती की योनि के अंदर बाहर करता जा रहा था। वह अपनी सिसकियो से मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित करती जा रही थी। उसकी सिसकियां इतनी अधिक तेज होती मैं बिल्कुल भी उसकी मादक आवाज को सुनकर ज्यादा देर तक रह ना सका। मैने मालती से कहा मेरा वीर्य बस गिरने वाला है मालती तो जैसे मेरे वीर्य का इंतजार कर रही थी कि कब मेरा वीर्य गिरे। कुछ ही क्षण बाद मेरा वीर्य बड़ी तेजी से मालती की योनि में जा गिरा जैसे ही मेरा वीर्य पतन मालती की योनि में गिरा तो वह मुझसे गले लग कर लिपट कर कहने लगी आज मुझे तुम्हारे साथ ही सोना है।

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