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लाजवाब हुस्न के जलवे


Hindi sex stories, kamukta मैं अपनी छुट्टी के दिन घर पर ही था मैं सोफे में बैठा हुआ था और अखबार पढ़ रहा था लेकिन ना जाने मेरी पत्नी को किस बात का गुस्सा था कि उसने मुझे गुस्से में कहा तुम यहां अखबार पढ़ रहे हो और वहां पर वह लोग हमारे घर के बाहर हमेशा कुछ ना फेक किया करते हैं। मैंने अपनी पत्नी नमिता से पूछा लेकिन नमिता बहुत गुस्से में थी मैं जब बाहर गया तो मैंने देखा वहां पर कुछ लोगों ने कचरा फेंका हुआ है मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा था कि हमारे घर के बाहर हमेशा कौन कचरा फेंक जाता है। मेरी पत्नी नमिता कहने लगी कि यहां से कितनी ज्यादा बदबू आती है मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी हूं इसलिए मैंने एक दिन एक सफाई वाले को बुला कर वहां से कचरा साफ करवा दिया।

नमिता ने मुझसे कहा यदि तुम्हें कभी भी यहां पर कचरा फेंकते हुए दिखाई दे तो तुम उसे डांट कर भगा देना। जब भी वहां पर कोई कचरा ले कर आता तो मेरी पत्नी नमिता उसे डांट कर वहां से भगा दिया करती। नमिता एक दिन मुझे कहने लगी मैं घर में अकेली हो जाती हूं तो क्यों ना आज कहीं घूमने चलें मैंने भी सोचा चलो आज कहीं घूम आते हैं। मैंने अपने पापा मम्मी से भी कहा कि आप लोग हमारे साथ चले वह लोग भी हमारे साथ आ गए और उस दिन हम लोगों ने खूब एंजॉय किया मुझे बहुत अच्छा लगा काफी समय बाद नमिता और पापा मम्मी साथ में थे। जब उस दिन हम लोग घर लौटे तो मैंने खाना बाहर से ही ऑर्डर किया सब कुछ मेरे जीवन में सामान्य तरीके से चल रहा था ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे कि मुझे कोई तकलीफ हो या फिर कोई परेशानी हो लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब मैं पूरी तरीके से परेशानियों में गिरता चला गया।

मेरे पापा की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी इसलिए उनकी दवाइयों में बहुत ज्यादा खर्चा होने लगा उसके बाद मेरे ऊपर घर का भी सारा दारोमदार था जिससे कि मैं परेशान रहने लगा नमिता मुझे कई बार समझाया करती और कहती कि तुम इतनी जल्दी टेंशन मत लिया करो। कोई यह नहीं जानता था कि मैं अंदर से कितना टूट चुका हूं क्योंकि पिताजी की तबीयत खराब होने के बाद सारा खर्चा उन्हीं के ऊपर लगने लगा था मेरी आधे से ज्यादा सैलरी तो उनकी दवाइयों के ऊपर ही चली जाती थी लेकिन फिर भी मैंने हार नहीं मानी और मैं अपने पिताजी का इलाज अस्पताल में करवा रहा था। एक दिन नमिता ने मुझे कहा कि यदि आपको पैसों की आवश्यकता हो तो मैं अपने घर में बात करूं मैंने नमिता से कहा तुम यह सब रहने दो तुम्हें अपने घर में बात करने की क्या जरूरत है। मैंने नमिता को साफ तौर पर मना कर दिया था क्योंकि मेरा स्वाभिमान मेरे आड़े आ चुका था और मैं नहीं चाहता था कि मैं किसी से भी मदद लूं लेकिन पिताजी की तभियत दिन ब दिन खराब होती जा रही थी उन पर ना तो दवाई का असर था और ना ही वह ठीक हो रहे थे। मैं बहुत ज्यादा टेंशन में रहने लगा था और मैं अपनी टेंशन को किसी से भी साझा नहीं किया करता मेरी पत्नी नमिता भी कई बार मुझसे पूछती तो मैं उसे कहता सब कुछ ठीक है लेकिन मुझे ही मालूम था कि कुछ भी ठीक नहीं चल रहा। मेरी आधे से ज्यादा तनख्वा तो पिताजी की दवाइयों के खर्चों में ही चली जाया करती थी मैं बहुत ज्यादा परेशान तो हो ही चुका था लेकिन उसी बीच मुझे मेरे दोस्त ने सहारा दिया मेरे दोस्त ने मुझे कहा यदि तुम्हें पैसे चाहिए हो तो तुम मुझसे ले सकते हो। मैंने उसे पैसे लेने से इंकार कर दिया लेकिन एक दिन उसने मेरी पत्नी नमिता को कुछ पैसे दे दिये मैं उसे पैसे लेना नहीं चाहता था लेकिन उसने मेरी पत्नी को पैसे दे दिए और उसके बाद मैंने पिताजी का इलाज एक अच्छे अस्पताल में करवाया जिससे कि वह ठीक हो गए। अब वह ठीक हो चुके थे और मेरे दोस्त का एहसान भी मुझ पर था मैं नहीं चाहता था कि उसके पैसे मैं अपने पास रखूं इसलिए मैंने जल्द से जल्द उसके पैसे लौटाने के बारे में सोच लिया और फिर मैंने उसके पैसे लौटा दिए। वह कहने लगा तुम्हें यह पैसे लौटाने की क्या आवश्यकता है मैंने उसे कहा देखो तुमने मेरी मदद की मैं नहीं चाहता कि किसी का भी एहसान मुझ पर रहे वह मुझे कहने लगा ठीक है तुम्हें जैसा ठीक लगे।

मैंने उसके पैसे दे दिए थे और अब हमारे घर में स्थिति सामान्य होने लगी थी पापा भी अब ठीक हो चुके थे मेरी पत्नी पापा मम्मी का बहुत अच्छे से ध्यान रखा करती थी और घर की सारी जिम्मेदारियों उसके ही कंधे पर थी उसने कभी भी मुझे कोई शिकायत का मौका नहीं दिया। मेरे बच्चे भी बड़े होने लगे थे तो मेरे ऊपर उनका भी ज्यादा दबाव होने लगा। मैंने एक दिन सोचा कि अपने घर के ऊपर वाला फ्लोर किराए पर दे देता हूं तो मैंने उसे किराए में देने की सोची लेकिन मुझे कोई ऐसा मिल ही नहीं रहा था जो कि मुझे किराया भी अच्छे से दे पाता तभी मुझे एक फैमिली मिली जब मैंने उनसे बात की तो वह लोग मुझे बहुत अच्छे और सज्जन लगे। मैंने उन्हें कहा आप लोग यहां रह सकते हैं वह लोग हमारे घर में रहने लगे थे मेरे ऊपर का फ्लोर मैंने उन्हें दे दिया था उन लोगो की हमसे अच्छी बातचीत थी उनका नाम सुरजीत था और उनकी पत्नी का नाम महिमा। उनके साथ उनकी बुजुर्ग माँ भी रहती थी उनके दो बच्चे हैं एक कि उम्र 12 वर्ष है और एक 10 वर्ष की लड़की है उन लोगों का हमारे घर में भी अच्छा मेल मिलाप था मेरी पत्नी नमिता को तो सुरजीत जी की पत्नी महिमा के साथ में समय बिताना अच्छा लगता था और वह लोग एक साथ ज्यादातर समय बिताया करते। मेरी भी चिंता अब कम होने लगी थी क्योंकि मुझे थोड़ा बहुत पैसा किराए से आ जाया करता था और बाकी मुझे मेरे ऑफिस से तनख्वा मिल जाए करती थी। मैं अब अपने काम में ही बिजी रहता था अब मैं पहले से ज्यादा खुश रहने लगा था और सब कुछ बहुत ही अच्छे से चलने लगा था सुरजीत जी और मैं कभी-कबार ही मिला करते थे।

एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि आप ड्रिंक करते हैं मैंने कहा हां कभी कबार कर लेता हूं लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि वह तो हर रोज अपने घर पर ड्रिंक किया करते हैं लेकिन यह बात उन्होंने मुझे कभी पता ही नहीं चलने दी और ना ही मुझसे उन्होंने कभी इस बारे में बात की। जब उन्होंने मुझसे पूछा तो मैं उनके साथ चला गया उस दिन हम दोनों ने साथ में बैठकर ड्रिंक कि मैंने जब उन्हें अपने पिताजी के बारे में बताया तो वह कहने लगे आपने तो बहुत ही ज्यादा अपने माता पिता की सेवा की है और आपने अपने पिताजी का एक अच्छे अस्पताल में इलाज करवाया है इससे बढ़कर क्या हो सकता है। वह भी अपनी मां से बहुत प्यार करते हैं और उनकी मां का नेचर भी बहुत अच्छा है हालांकि उनकी मां की उम्र काफी हो चुकी है और उन्हें अच्छे से सुनाई नहीं देता लेकिन उसके बावजूद भी वह उनकी बड़ी अच्छे से देखभाल किया करते हैं। एक दिन सुरजीत जी और मैं साथ में ही बैठ कर बात कर रहे थे तभी मेरी पत्नी नमिता ने मुझे कहा आप खाना खाने के लिए आ जाइए मैंने सुरजीत जी से कहा मैं अभी चलता हूं वह कहने लगे ठीक है आदर्श जी हम लोग कभी और बैठेंगे। मैं खाना खाने के लिए चला गया मेरी पत्नी मुझसे पूछने लगी आप आज सुरजीत जी के साथ बैठे हुए थे तो मैंने अपनी पत्नी से कहा हां दरअसल उन्होंने मुझे ड्रिंक के लिए कहा तो मैं उनके साथ ही बैठ गया था।  एक दिन सुरजीत अपने काम के सिलसिले में कहीं बाहर चले गए उनकी पत्नी महिमा और उनकी मां घर पर थे।

मुझे उस दिन उनसे कुछ जरूरी काम था मैं उनसे मिलने के लिए गया तो उनकी पत्नी महिमा कहने लगी वह अपने ऑफिस के काम से कहीं बाहर गए हुए हैं वह दो तीन दिन बाद लौटेंगे उनकी पत्नी महिमा ने जो नाइटी उस दिन पहनी हुई थी उसे देखकर मैं पूरी तरीके से उनके प्रति अपने मन में एक अलग ही धरणा पाल बैठा मैं सिर्फ उनको चोदना चाहता था मुझे एक दिन वह मौका मिल ही गया। उस दिन वह हमारे घर पर आ गई जब महिमा भाभी हमारे घर पर आई तो वह मुझसे पूछने लगी आज नमीता नहीं दिखाई दे रही हैं। मैंने उन्हें कहा वह अपने मम्मी पापा के पास गई है और आज घर पर कोई भी नहीं है वह मेरे पास आकर बैठ गई और मुझसे बात करने लगी। मेरे और उनके बीच में बात चल रही थी तभी मैंने उनसे कहा कि आपने किसी गैर पुरुष के साथ कभी संबंध बनाएं है तो वह अपनी बड़ी बड़ी आंखो से मुझे देखने लगी। मैंने जब उनके होठों को किस किया तो वह पीछे की तरफ हो गई मैंने उन्हें अपनी बाहों में ले लिया और उनके होठों को में चूमने लगा।

वह मेरी आगोश में आ चुकी थी वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गई थी मैंने जैसे ही अपने लंड को बाहर निकाला तो वह उसे हाथ मे लेते हुए अपने मुंह में लेने लगी। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया था और बड़े अच्छे से बहुत सकिंग कर रही थी। मैं बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी मै महिमा भाभी के साथ में ऐसा कर पाऊंगा। जब मैंने उनके दोनों पैरों को चौड़ा किया तो उनकी योनि से गिला पदार्थ बाहर निकल रहा था। मैंने धक्का देते हुए उनकी योनि के अंदर अपने लंड को डाल दिया मैंने काफी तेज गति से उनको धक्के दिए उनकी नंगी चूत के मैने बहुत देर तक मजे लिया। ऐसा काफी देर तक चलता रहा जब वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो गई तो उन्होंने मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड लिया और मेरा वीर्य भी कुछ क्षणो बाद गिर गया, वह कहती आपका लंड बड़ा ही मोटा है और उसमें कुछ अलग बात है। मैंने नमिता भाभी से कहा आपके बदन को देखकर मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पाया था और मुझे बहुत खुशी हुई जब मैंने आपके साथ सेक्स संबंध बनाए। नमिता भाभी चली गई लेकिन मुझे उनके साथ जो सेक्स संबंध बनाने में मजा आया वह एक अलग ही फीलिंग थी।

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