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अलग है रिश्ता सेक्स का


Hindi sex story, Antarvasna मैं अपने घर पर ही था तभी हमारे पड़ोस की एक आंटी आई और उन्होंने हमारे घर की बेल बजाई मैंने जब दरवाजा खोला तो वह मुझसर पूछने लगी बेटा क्या मम्मी घर पर हैं। मैंने कहा जी आंटी मम्मी तो घर पर ही हैं आइए आप अंदर आ जाइये मैंने उन्हें अंदर आने को कहा वह अंदर आ कर बैठ गई मम्मी बाथरूम में कपड़े धो रही थी। मैंने कहा क्या मैं आपके लिए चाय बना दूं वह कहने लगी नहीं बेटा रहने दो तुम्हारी मम्मी को आने दो मम्मी 10 मिनट बाद आई उन्होंने कहा अरे आप कहां थे तो मम्मी ने कहा मैं कपड़े धोने चली गई थी और आप ने इंतजार किया उसके लिए आपको सॉरी कहना चाहती हूं। मम्मी उनकी बहुत इज्जत करती है वह हमारे पड़ोस में ही रहती हैं उनके परिवार में उनके दो लड़के हैं जो कि मुझसे बड़े हैं और वह दोनों ही जॉब करते हैं। आंटी ने मेरी मम्मी से कहा कुछ दिनों बाद कॉलनी के लोगों ने घूमने का प्लान बनाया है तो क्या आप चलेंगे मम्मी ने उनसे पूछा लेकिन सब लोग कहां जाने वाले हैं। आंटी ने बताया छुट्टी के दिन जू में जाने का प्लान बनाया है हमारी कॉलोनी में सब लोग एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं और हमारी कॉलोनी का माहौल बहुत अच्छा है इसलिए हर महीने कहीं ना कहीं घूमने के लिए जाते हैं।

आंटी ने बताया कि उस दिन सब अपने घर से कुछ न कुछ बना कर लाने वाले है मम्मी ने कहा ठीक है हम लोग आ जाएंगे। हमारे घर में हम लोग बस तीन ही सदस्य हैं मेरे पापा उस वक्त ऑफिस गए हुए थे और मैं घर पर ही था क्योंकि मैं कॉलेज नहीं जा पाया था। हम लोग जब घूमने के लिए चिड़िया घर गए तो वहां पर सब लोग बहुत खुश थे और छोटे बच्चे तो इतना ज्यादा खुश थे की वह लोग बहूत शोर मचा रहे थे उस दिन का पिकनिक बहुत ही अच्छा रहा। जैसे ही हम लोग घर लौटे तो हमारे घर पर एक अंकल आए हुए थे यह तो अच्छा है कि वह अंकल भी उसी वक्त आए थे जब हम लोग घर लौटे थे वह पापा के दोस्त हैं और उस दिन वह हमारे घर पर ही रुकने वाले थे मैं उनसे पहली बार ही मिला था। पापा ने मुझे बताया कि यह रमेश अंकल हैं और यह मेरे बचपन के दोस्त हैं यह रोहतक में रहते हैं हम लोग बचपन से ही दिल्ली में रहते आए हैं मेरी पैदाइश भी दिल्ली की है।

मैं उन अंकल से कभी मिला नहीं था लेकिन उन अंकल की बातों से मैं बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ और वह बड़े ही अच्छे से बात कर रहे थे उन्होंने बताया कि उनके बच्चे भी मेरे ही उम्र के हैं और उस दिन वह हमारे घर पर ही रुके। मेरा कॉलेज भी खत्म होने वाला था मैंने अपने कॉलेज के आखिरी वर्ष के पेपर दिए और पेपर अच्छे हुए। कुछ समय बाद मेरा रिजल्ट भी आ गया और मैं अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा कर चुका था अब मैं अपने लिए कोई नौकरी देखने लगा। मैं किसी अच्छी कंपनी में नौकरी के लिए अप्लाई करना चाहता था परंतु मेरे पापा चाहते थे कि मैं किसी अच्छी सरकारी नौकरी की तैयारी करूं इसलिए उन्होंने मुझे मना कर दिया और कहा बेटा तुम किसी अच्छी नौकरी की तैयारी करो और यदि कुछ और समय चाहिए तो तुम कुछ और टाइम ले लो। मैंने भी पापा की बात मान ली और अपने आगे की तैयारी करने लगा मैंने कई सरकारी एग्जाम की तैयारी की लेकिन कहीं पर मेरा सिलेक्शन नहीं हो पाया। मैं इस बात से बहुत ज्यादा हताश हो गया क्योंकि मैंने कभी भी उम्मीद नहीं की थी कि मैं एग्जाम क्लियर नहीं कर पाऊंगा। मैं पढ़ने में पहले से ही अच्छा था परंतु ना जाने ऐसा क्या हुआ कि मैं कोई भी एग्जाम क्लियर नहीं कर पाया इसलिए मैंने प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर ली। ज्यादा समय तक मैं भी खाली नहीं बैठ सकता था मैं अब एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करने लगा था शुरुआत में तो वहां मुझे बहुत कम तनख्वा मिली क्योंकि मैं फ्रेशर था लेकिन धीरे-धीरे मुझे समय होने लगा तो वहां मेरी जान पहचान अच्छी होने लगी और मेरी सैलरी भी बढ़ चुकी थी। मैं अपने काम से भी खुश था मुझे उसमें कोई भी दिक्कत नहीं थी मैं अपने ऑफिस के काम को बड़े लगन से किया करता धीरे-धीरे समय बीता जा रहा था एक दिन ऑफिस मैं एक मीटिंग थी उस मीटिंग के दौरान हमारे ऑफिस में सब लोग आए हुए थे वह मीटिंग बड़ी ही अच्छी हुई। उस दिन जब मैं अपने बॉस की बेटी से मिला तो हमारे बॉस ने हमे अपनी बेटी आयशा से मिलवाया आयशा ने कुछ समय पहले ही अपना एमबीए पूरा किया था और अब वह लौट आई थी उसने विदेश से ही अपनी पढ़ाई पूरी की थी।

हमारे बॉस चाहते थे की वह भी ऑफिस का काम संभाले इसलिए वह ऑफिस का काम संभालने लगी थी उसका नेचर बड़ा ही अच्छा था वह सब लोगों से बहुत फ्रैंक तरीके से बात किया करती। मुझसे भी आयशा की बात होती थी लेकिन हम लोगों की बात सिर्फ काम तक ही सीमित रहती थी उससे आगे कभी भी हम लोगों ने बात नहीं की परंतु आयशा से मेरी दोस्ती होने लगी थी और आयशा मुझे बहुत अच्छी लगने लगी थी। धीरे-धीरे हम दोनों की दोस्ती इतनी ज्यादा होने लगी कि हम दोनों एक दूसरे को समय देने लगे आयशा मुझसे मेरे बारे में पूछा करती तो मैं उसे अपने बारे में सब कुछ बता दिया करता अब समय बीता जा रहा था और आयशा और मेरे बीच में नजदीकियां बढ़ती ही जा रही थी। एक दिन तो आयशा ने मुझे अपनी तरफ से एक पार्टी दी और कहा आज मुझे तुम्हारे साथ समय बिताना था इसलिए मैंने सोचा कि यही ठीक रहेगा आयशा और मैंने उस दिन काफी बात की। मैं जब भी आयशा से बात करता तो मुझे बहुत अच्छा लगता उससे बात करना मेरे लिए बहुत अच्छा रहता था और मुझे उससे बात करने में ऐसा लगता जैसे कि मैं उससे प्यार करने लगा हूं।

हम दोनों एक दूसरे को समझते थे लेकिन मैंने कभी भी अपने दिल की बात आयशा से नहीं कही थी परंतु मुझे नहीं पता था कि आयशा हमारे रिश्ते को सिर्फ दोस्ती तक ही रखना चाहती थी। एक दिन आयशा ने मुझे अपने बॉयफ्रेंड से मिलवाया तो उस दिन मुझे बहुत बुरा लगा मुझे नहीं मालूम था कि आयशा के दिल में क्या चल रहा है लेकिन उसने जब अपने बॉयफ्रेंड से मिलवाया तो मुझे बहुत एम्बेरसिंग हो गई मुझे लगा कि मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखता हूं और आयशा एक अच्छे घर से ताल्लुक रखती है शायद इसी वजह से उसने मेरे साथ ऐसा किया लेकिन मैंने कभी इस बारे में नहीं सोचा कि मैंने तो आयशा से अपने दिल की बात कही ही नहीं थी। उसका बॉयफ्रेंड और वह एक दूसरे को काफी पहले से जानते हैं मैंने आयशा से बात करना कम कर दिया था हम दोनों की बातें सिर्फ काम तक ही सीमित रहती थी। आयशा मुझसे जब भी पूछती कि तुम मुझसे आजकल बात नहीं करते हो तो मैं उसकी बातों को ताल दिया करता और अब मैं उससे कम ही संपर्क में रहता था। आयशा को भी शायद इस बात का पता चल चुका था कि मुझे किसी ना किसी बात का तो बुरा लगा है वह इस बारे में पता करने की कोशिश करने लगी लेकिन उसे कभी भी इस बात का पता नहीं चला कि मैं उससे प्यार करता हूं। मुझे उसकी इस बात से बहुत तकलीफ हुई थी जब उसने मुझे अपने बॉयफ्रेंड से मिलवाया था परंतु मैंने भी अपने दिल से आयशा का ख्याल निकाल दिया और काम में ध्यान देने लगा। एक दिन मुझे आयशा ने अकेले में बुलाया और मुझे कहने लगी तुम्हें मालूम है मेरा ब्रेकअप हो चुका है।

मैंने उसे कहा मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता और मैं भला किसी के मैटर में क्यों टांग अड़ाऊ। वह मुझसे कहने लगी तुम मुझसे ऐसे क्यों बात कर रहे हो मैंने उससे कहा देखो तुम मेरे बॉस की लड़की हो और हम लोग सिर्फ अपने ऑफिस तक ही एक दूसरे के साथ रहते है और उसके बाद मुझे नहीं लगता कि बाहर भी मैं तुम्हारी इज्जत करु। उसे मेरी बातों का बहुत बुरा लग रहा था लेकिन जब उसने मुझे कहा मुझे तुम्हारा साथ चाहिए तो मैं समझ ना पाया कि उसे आखिरकार मुझसे क्या चाहिए। एक दिन उसने मुझे अपने कैबिन में बुलाया वह मुझे किस करने लगी मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वह ऐसा करेगी लेकिन उसके गुलाबी होठों को चूसना मेरे लिए भी अच्छा था। मैं काफी देर तक उसके होठों का रसपान करता रहा हम दोनों एक दूसरे से सिर्फ सेक्स के लिए ही जुडे थे। एक दिन वह मौका आ गया जब मैंने आयशा के साथ सेक्स किया उसने मुझे अपने घर बुलाया था मैं उसके घर गया था। उसने मेरे सामने अपने कपड़े क उतारा और कहा मेरा बॉयफ्रेंड मेरी जिंदगी से जा चुका है और तुम्ही मेरी इच्छाओं को पूरी कर सकते हो। उसने मेरे सामने जब अपने कपड़े उतारे तो मैंने उसके स्तनों को देखा और उसके स्तनों को मैंने अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया।

मैंने जब उसकी बड़ी गांड को अपने हाथों से दबाया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था उसका चिकना बदन और  उसकी चूत देख कर तो मेरे अंदर गर्मी बढ़ने लगी। मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा, उसकी चूत से मैंने पानी निकाल दिया उसकी चूत से पानी निकल चुका था और मेरे अंदर का जोश भी बढ़ चुका था। जैसे ही मैंने उसकी योनि के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो वह मुझे अपनी बाहों में लेने लगी और उसने मुझे अपने दोनों पैरों के बीच में जकड लिया। मैंने उसे बड़ी तेजी से झटके दिए मैं बड़ी तेज गति से उसे चोदे जा रहा था और वह अपने दोनों पैरों को खोलते हुए मुझे अपनी बाहों में ले रही थी। मैंने उसकी योनि को छिलकर रख दिया था जब उसकी इच्छा पूरी हो गई तो वह मुझसे लिपट कर लेटी रही लेकिन मेरा वीर्य पतन नहीं हो रहा था परंतु जैसे ही मेरा वीर्य पतन हुआ तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस हुआ। हम दोनों के बीच सिर्फ सेक्स का रिलेशन है उसके अलावा आयशा के साथ कुछ लेना देना नही है और ना ही वह मुझसे प्यार करती है वह सिर्फ सेक्स के लिए ही मेरे साथ है।

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